Monday, October 19, 2026

खुश मत होना

लड़ाई मेरी मेरे धैर्य से थी, तुमसे नहीं,
मगर हार गया मैं ,
तुम्हें लग रहा है तुमसे हार गया मैं,
सच तो ये है ,
तुमको हार गया मैं !

तुम्हारा इश्क अधीन है तुम्हारी काया के ,
सो ढल रहा साथ तुम्हारे !
मेरा इश्क  अधीन है  मेरी छाया के  ,
उम्र दिखेगी ही नहीं किसी किनारे !

किसी दिन सो के उठोगी तुम,
मगर मैं नहीं उठूंगा,
अपनी जीत का जश्न तब मनाना ही पड़ेगा तुम्हें  !
रोना चाहो या न चाहो,
रो के दिखाना ही पड़ेगा तुम्हें !

तब मुकाबला तुम्हारा ,
सुख से होगा तुम्हारे ,
हार गयी तो सब पूछेंगे अब क्या करोगी,
खुश मत होना,
जीत के गड्ढे में तो अकेली ही गिरोगी  !

सुख हो या खुशी या जीत ही क्यों न हो 
सब नज़र आयेंगे 
पकड़ने जाओगी,हाथ नहीं आयेंगे !

हमारा प्रेम नहीं मरेगा,
वो चला जायेगा साथ मेरे ही,
देखना जब भी उस पार गया मैं !




















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