Friday, October 23, 2026

ये कमाल है हमारे यहां

ये रिवाज है हमारे यहां , 
बच्चे कहानियां सुनते हैं , 
बूढ़े कहानियां सुनाते हैं , 
और जवान चुपचाप कहानियां बन जाते हैं !

ये समाज है हमारे यहां , 
लड़कियों को जिंदा रहने के लिये , 
चुपचाप रोज मरने की आदत सिखाई जाती है ! 

ये राज है हमारे यहां, 
कि राजनीति हमारे चरित्र का हिस्सा है, 
जहां अवाम से हम एक वोट बन जाते हैं, 
कानूनन हमें जातियों में काटा जाता है  , 
ऊंच नीच में बांटा जाता है, 
फिर हम सब एक हैं, ये बात बताई जाती है  ! 
इस तरह हम सब , 
बेवकूफ पेड़ की टहनियाँ बन जाते हैं  ! 

ये कमाल है हमारे यहां,
अयोग्यता योग्यता को मुंह चिढ़ाती है,
सरकारी नौकरियां दंगल का मैदान बन जाती है,
कौवे मोती चुगते हैं ,
वोट बनते हैं जातियों से छन-छन,
सरकारी नौकरी में आरक्षण ,
चलो उस जज को बताते हैं  ,
जिसे हम चुनते ही नहीं ,
वो भी तो चुपचाप काॅलेजियम प्रणाली से बन जाते हैं  ।
फिर भी हम अपने प्रजातंत्र पर इतराते हैं ।।

   

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