बच्चे कहानियां सुनते हैं ,
बूढ़े कहानियां सुनाते हैं ,
और जवान चुपचाप कहानियां बन जाते हैं !
ये समाज है हमारे यहां ,
लड़कियों को जिंदा रहने के लिये ,
चुपचाप रोज मरने की आदत सिखाई जाती है !
ये राज है हमारे यहां,
कि राजनीति हमारे चरित्र का हिस्सा है,
जहां अवाम से हम एक वोट बन जाते हैं,
कानूनन हमें जातियों में काटा जाता है ,
ऊंच नीच में बांटा जाता है,
फिर हम सब एक हैं, ये बात बताई जाती है !
इस तरह हम सब ,
बेवकूफ पेड़ की टहनियाँ बन जाते हैं !
ये कमाल है हमारे यहां,
अयोग्यता योग्यता को मुंह चिढ़ाती है,
सरकारी नौकरियां दंगल का मैदान बन जाती है,
कौवे मोती चुगते हैं ,
वोट बनते हैं जातियों से छन-छन,
सरकारी नौकरी में आरक्षण ,
चलो उस जज को बताते हैं ,
जिसे हम चुनते ही नहीं ,
वो भी तो चुपचाप काॅलेजियम प्रणाली से बन जाते हैं ।
फिर भी हम अपने प्रजातंत्र पर इतराते हैं ।।
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