Friday, May 29, 2026

मेरे पास एक हाड़ मांस का चबूतरा है

मेरे पास एक हाड़ मांस का चबूतरा है
मैं अटक गया हूँ यहाँ
तुम सबको भी यहाँ तक आना है, मेरे बच्चों  ! 
यहाँ अटकना है मेरी तरह
मेरे जाने से पहले, 
या जाने के बाद  ! 

ले आना, 
अपनी मुठ्ठियों में, जेबों में भर भर कर , 
तुम्हारी माँ ने जो सिलबट्टे पर पीस रखी थी, 
खुश्बू भरी यादें, 
मैंने टोकरी में भर रखें थे जो, 
तेरे बचपन के तुतलाते संवाद  ! 

अगर जीवन की दौड़ में, 
सांसो के शोर में, 
भूल गये जो ये सब लाना, 
व्यर्थ हो जायेगा पूरी तरह, 
तेरा जीवन निचोड़ कर  पैसे कमाना  ! 

उम्र के आखिरी पन्नों का ठोस कबाड़ है ये चबूतरा, 
हमारी इच्छाओं का अनचाहा भार है ये चबूतरा, 
मैं पहुँच चुका हूँ, 
मैं अटक चुका हूँ, 
मैं बिलकुल अकेला हूँ यहाँ, 
तेरे बच्चे भी तुझे यहाँ अकेला छोड़ेगें, 
कारणों में अपनी व्यस्तता जोड़ेगें  ! 

आना ,महसूस करना  बेबसी मेरी, 
मिलेगी चबूतरे पर चिपकी, 
आंसुओं से लथपथ, 
तुम्हारी 
किलकारियों के आकार की बूंदें, 
उसी के साथ लिपटी मेरी याद  !!