Friday, August 21, 2026

सब छूटेगें धीरे धीरे,

स्वागत है आपका 
मेरी शब्दों की यात्रा में, 
इन्हें पढ़ना नहीं महसूस करना, 
जिंदगी में अपने प्रिय के चेहरे की मुस्कान की तरह! 

नहीं मिलेगा फिर कोई जन्म, 
ना ही कोई दुनियाँ, 
अगर  खो गया तुम्हारे प्रिय का चेहरा , 
तो मानों अनंत काल  के लिये खो गया , 
यादों की भठ्ठी में जा सो गया एक ध्यान की तरह! 

हमारा रूप, हमारा नाम सब ही वजनहीन हैं, 
वजन केवल आज में है, 
कल तो निश्चित है ही नहीं, 
सो जितना आनंद समेट सको समेट लो, 
आज की खुशी को आज ही महसूस करो, 
अपने प्रिय के दायरे को अपना लो पूरे जहान की तरह  ! 

किसी के झांसे में न आना, 
कोई ज्ञान न अपनाना, 
सब छूटेगें धीरे धीरे, 
कोई शिकन माथे मत लाना, 
तुम तो खुद से भी छूटोगे धीरे धीरे, 
धीरे धीरे समझ ही लोगे , 
किसी का आना किसी का जाना, 
बस खुद से बिछड़ने से पूर्व, 
प्रियजनों की आंखों में घुल जाना, 
फिर नजर भी आओगे, 
छिपाये भी जाओगे, 
तिजोरी में रखे सामान की तरह  ! 







Thursday, August 6, 2026

ले आना

मेरे पास एक हाड़ मांस का चबूतरा है
मैं अटक गया हूँ यहाँ
तुम सबको भी यहाँ तक आना है, मेरे बच्चों  ! 
यहाँ अटकना है मेरी तरह
मेरे जाने से पहले, 
या मेरे जाने के बाद  ! 

ले आना, 
अपनी मुठ्ठियों में, जेबों में भर भर कर , 
तुम्हारी माँ ने जो सिलबट्टे पर पीस रखी थी, 
खुश्बू भरी यादें, 
मैंने टोकरी में भर रखें थे जो, 
तेरे बचपन के तुतलाते संवाद  ! 

अगर जीवन की दौड़ में, 
सांसो के शोर में, 
भूल गये जो ये सब लाना, 
व्यर्थ हो जायेगा पूरी तरह, 
तेरा जीवन निचोड़ कर  पैसे कमाना  ! 

उम्र के आखिरी पन्नों का ठोस कबाड़ है ये चबूतरा, 
हमारी इच्छाओं का अनचाहा भार है ये चबूतरा, 
मैं पहुँच चुका हूँ, 
मैं अटक चुका हूँ, 
मैं बिलकुल अकेला हूँ यहाँ, 
तेरे बच्चे भी तुझे यहाँ अकेला छोड़ेगें, 
कारणों में अपनी व्यस्तता जोड़ेगें  ! 

आना ,महसूस करना  बेबसी मेरी, 
मिलेगी चबूतरे पर चिपकी, 
आंसुओं से लथपथ, 
तुम्हारी 
किलकारियों के आकार की बूंदें, 
उसी के साथ लिपटी मेरी याद  !!