Wednesday, October 28, 2026

जो मन कोलाहल करता है

जो मन कोलाहल करता है ,
मत मारो मन को,
प्रमाण है जो तेरे जीवन का !

क्यों करना है ध्यान ?
ध्यान खाली कर देता है ,
तुम भरे गिलास सा लबालब,
जो छलक रहा , पल पल हिल हिल कर,
ये ध्यान सदा ही धोखे से,
गिलास से बदल तुम्हें,
खाली थाली कर देता है !

क्यूं  मार रहे हर पल मन को  ?
मन तुम में जीवन भरता है !
तुम जिंदा हो ,
तब ही तों,
ये मन कोलाहल करता है !

लोगों की बातें सुन लेना ,
अच्छी जो लगे वो चुन लेना ,
पर ध्यान रहे सुन कर,चुन कर,
करना केवल अपने मन का  !





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