न तो दुख का कोई रहस्य है ,
न ही खुशियां हैं रहस्यमयी !
न हमारा जीना ,
न हमारा मरना !
बस हमें खुद को समझना है,
बस हमें खुद को समझाना है ,
हम केवल खुद ही के लिये हैं रहस्यमयी,
नहीं पता हमें ,
जीवन के रस को कैसे है पीना ,
जीवन है मिला तो क्या है करना !
हम तो मात्र जीने के लिये जीते हैं,
सांसों के अतिरिक्त कोई आधार नहीं है जीने का !
मौत को अछूत समझते हैं
सो मृत्यु संग व्यवहार नहीं है जीने का। !
विचारों की खेती में जिसने, खुद को बोया ,
मरने के बाद भी उसका अस्तित्व नहीं खोया ,
हमें केवल यही है पता,
कि जीने के बाद है , बस मरना !
हम प्रकृति के रहस्य को भेदने में मर खप जाते हैं ,
रहस्य जानना ही क्यों है,
बता नहीं पाते हैं !
पैसे कमाते हैं,
उम्र गंवाते हैं,
जीने के फायदे से ज्यादा,
मरने के बाद के फायदे पर फिसले जाते हैं,
हमारी ये आदतें हैं रहस्यमयी ,
कि एक प्रथा बनायी है ,
जहां घोषित करते हैं ,
कि शांति स्थापित करने के लिये जरूरी है लड़ना !
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