असंभव होती हमारी जागरूकता ,
हमारी नीयत के खोखलेपन का सबूत है !
कुकुरमुत्ते की मानिंद उगी टोपियों की जड़,
यकानक राजनीतिक क्यूँ हो गई ?
हमारे बच्चे की भूख तो सामाजिक थी ना ,
फिर क्यूँ बन गई नारा ?
अनशन हुयें , हड़ताल हुई ,समझौते हुये ,
खिलाड़ी अपने खेल से पुर्णतः संतुष्ट थें कि
किसने किसका खेल बिगाड़ा !
कल फिर वोटिंग होगी ,
नहीं मालूम कौन जीतेगा ,
पर मालूम है की हमारी हार होगी !
खूब घूमते हो ना ,
कभी खुद के पासपोर्ट पर ,
अपने दिल का वीजा लो ,
पूरी यात्रा में निः शुल्क है आना- जाना ,
बस एक निवेदन है -
यात्रा में अगर भारत नजर आये ,
तो उसे जरुर बाहर लाना !!
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