Friday, October 17, 2025

कल घूमते -घूमते

कल  घूमते -घूमते  शहर के एक  घर  से  जब बात हुई, 
तो उसके  बंद  दरवाजे  ने   कुछ  राज यूँ  खोले -
चारपाई  को  ड्राईंग -रूम  से   हटा कर , 
पीछे  बरामदे   में  रखना , 
उतना   नहीं  था  दुखद  उसके  लिए , 
जितना दुखद था बाबूजी का ,
अब उस  चारपाई  पर, 
बरामदे  में  सोना !

सुविधानुसार  तर्क   भी बनाये  गये , 
घरवालों  की तरफ  से , 
कि , 
ड्राईंग - रूम  के  हो-हल्ले  से  उन्हें    निजात मिली , 
वहीँ  बरामदे  में  सटे  बाथरूम  होने  से , 
उनकी दिनचर्या  में  सरलता  आयी !

फिर  उस  दरवाजे  ने , 
मेरे कान  में   धीमे  से  बताया -
बेटा   बुरा  नहीं  है  इतना, 
वो तो  बाबूजी  ने   खुद  प्रस्ताव  रखा था , 
नए  सोफे  की  जगह  बनाने  हेतु !

बाजू  वाले  दरवाजे  के   बारे में  बताया , 
उसके   अन्दर  कमरे  तो  हैं , 
मगर  नहीं  है  बरामदा ,
सो  उनके  बाबूजी आश्रम  में  रहतें  हैं !

बेटा  उनका भी  नहीं  है  बुरा , 
कितना  ख्याल रखता  है  -
हर महीने  मिलने  जाता  है,
मिलने   वालों को   बताता  है -
घर  पे तो   कितने  अकेले  थे  बाबूजी , 
वहाँ  तो  हमउम्र  की अच्छी  कंपनी  मिल गई ! 

मगर   अभी तक  यकीन  नहीं  आया  , 
कि  उस  बंद  दरवाजे   ने   मुझे  ये सब  बताया ...
हे  ईश्वर ! 
क्या  मेरे  बालों  में  आती  सफेदी  देख  ली  उसने ??

No comments:

Post a Comment