कई दिनों से देख रहा हूँ ,
तुम खोज रही हो मुझे ,
अपनी पर्स में !
टटोल रही हो मुझे ,
ए टी एम कार्ड में !
एक बार आलिंगन में झांक लिया होता ,
शायद मुझे महसूस कर पाती !
ढ़ेर सारी शिकायतों को उढेल कर मुझ में ,
एक शिकायत शेष बता रही हो कि ,
मैं क्यों बन गया डस्टबीन ?
सच कहूँ ,
मैं तो बनना चाहता था गमला ,
काश !
तुम खोज रही हो मुझे ,
अपनी पर्स में !
टटोल रही हो मुझे ,
ए टी एम कार्ड में !
एक बार आलिंगन में झांक लिया होता ,
शायद मुझे महसूस कर पाती !
ढ़ेर सारी शिकायतों को उढेल कर मुझ में ,
एक शिकायत शेष बता रही हो कि ,
मैं क्यों बन गया डस्टबीन ?
सच कहूँ ,
मैं तो बनना चाहता था गमला ,
काश !
एक पौधा फूलों का लगा कर देखा होता मुझमे !
मेरी कल्पना में ,
तुम होती हो एक बहुत बड़ा समतल सा खेत ,
मैं हल सा तुम पर चल रहा होता हूँ -
सुन्दर- सुन्दर फूलों के बगीचे की आशा में !
यूँ मत हँसो मुझ पर ,
मैं नहीं हूँ पागल ,
जिस दिन हो जाउंगा पागल ,
उस दिन रो भी नहीं सकोगी तुम !!
मेरी कल्पना में ,
तुम होती हो एक बहुत बड़ा समतल सा खेत ,
मैं हल सा तुम पर चल रहा होता हूँ -
सुन्दर- सुन्दर फूलों के बगीचे की आशा में !
यूँ मत हँसो मुझ पर ,
मैं नहीं हूँ पागल ,
जिस दिन हो जाउंगा पागल ,
उस दिन रो भी नहीं सकोगी तुम !!
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