हे ईश्वर !
मझे नहीं याद मैं अंतिम बार कब था रोया ,
जन्म के समय ही रोया था शायद ,
क्यों कि ,
उस वक्त किसी ने लगाया होगा मुझे गले !
आज मैं पुन : चाहता हूँ रोना ,
मेरे पास नहीं है कोई ,
जो लगाये गले ,
बैठे मेरे पास ,
मेरे बालों को सहलाए ,
पूरी गृहस्थी है ,
मगर जीवन की हँसी मुझ पर हँसती है !
हे ईश्वर !
क्या मैं बंधक हूँ खुद के शरीर का ?
क्यूँ न लिपटता मुझ से कोई ??
दिल है कि , है इक सन्नाटा ?
क्यूँ ना मेरी आँखे रोयी ??
हे ईश्वर !
नहीं आ रहा याद मैं अंतिम बार कब था सोया ?
बस इन्तजार है इक जोड़ी बाहों का ,
मिल जायेगी तो लिपट के सो लुंगा ,
सोने से पहले जी भर के रो लुंगा !
जब आऊँगा पास तुम्हारे ,
तुम मेरे बालों को सहलाना ,
नहीं भेजना इस हृदयहीन दुनियाँ में वापस !
चाहता हूँ खुद के आकार को खोना !
जीवन की जटिलताओं में ,
इक कुटिल हँसी तो मिल भी जाती है ,
नहीं मिलता है अंततः निश्चल रोना !!
----------------- तनु थदानी
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