Friday, October 17, 2025

क्या मैं बंधक हूँ

हे  ईश्वर !
मझे  नहीं  याद  मैं  अंतिम   बार   कब  था   रोया  ,
जन्म  के  समय ही  रोया  था  शायद , 
क्यों  कि , 
उस  वक्त   किसी ने   लगाया  होगा  मुझे  गले !

आज  मैं  पुन : चाहता  हूँ  रोना , 
मेरे पास नहीं   है कोई , 
जो लगाये   गले , 
बैठे  मेरे  पास , 
मेरे  बालों  को  सहलाए , 
पूरी  गृहस्थी  है , 
मगर  जीवन  की  हँसी   मुझ पर  हँसती  है !

हे ईश्वर !
क्या  मैं  बंधक  हूँ  खुद   के  शरीर  का ?
क्यूँ  न  लिपटता  मुझ से  कोई ??
दिल है  कि ,  है  इक  सन्नाटा ?
क्यूँ    ना  मेरी  आँखे  रोयी ??

हे  ईश्वर !
नहीं   आ  रहा याद  मैं  अंतिम  बार  कब  था  सोया ?
बस  इन्तजार  है   इक  जोड़ी  बाहों   का , 
मिल   जायेगी तो   लिपट  के सो  लुंगा , 
सोने  से  पहले  जी  भर के  रो  लुंगा  !
जब  आऊँगा  पास    तुम्हारे , 
तुम  मेरे  बालों  को  सहलाना , 
नहीं   भेजना  इस  हृदयहीन  दुनियाँ  में  वापस !
चाहता   हूँ  खुद   के   आकार को  खोना !    
जीवन  की  जटिलताओं  में , 
इक   कुटिल हँसी  तो मिल  भी   जाती है , 
नहीं   मिलता  है  अंततः  निश्चल  रोना !!
----------------- तनु थदानी

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