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Friday, October 17, 2025

मूलतः ठग हैं हम !

अदभुत  शैली  के  ठग  हैं  हम ,
जो  सर्वप्रथम  स्वयं  को  ठगते  हैं !

योग्यता  के  बाजार   में  , 
खुद   को  बेच  कर   खुश  होना ,
गैर   जरुरी  मसौदों  को  , 
पूरे जीवन  सिर  पे   ढोना, 
किसी  जंगली  जानवर  के  लगभग  हैं  हम !
हम  जानते  हैं  कि  ठग   हैं  हम !!

अपने  बच्चों  के  समक्ष ,
चरित्रवान   होने  का  ढोंग  करते - करते, 
हम   ना  कभी  ऊबते   हैं  ,
ना  थकते   हैं ,
यूँ  ही  पीढ़ियों  से , 
आदतन  ही  इक  दूसरे  को  ठगते  हैं !
जीवन  की  अंगूठी  में  ज्यों  नकली सा नग हैं  हम ! 
हम  खुश  हैं  कि  ठग  हैं  हम !!
रिश्तों   में  भी   लाभ- हानि   का  गणित  बैठाते  हैं ,
बूढ़े होते माँ -बाप की उपयोगिता पर, 
दिमाग लगाते हैं, 
दिमाग की दिल  से  सांठ - गांठ को रोकते   ,
हर  पग हैं  हम !
क्यों  कि  मूलतः  ठग  हैं  हम !!
----------------------  तनु थदानी