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Friday, October 17, 2025

हवा की शिकायत जायज़ थी

गन्दी  बदबूदार  नालियों  के  पानी  से ,
नहा  के  निकली ,
मंगलसूत्र  ठीक  किया ,
काजल -  बिंदी - लिपिस्टिक  लगायी ,
घर  आ  कर  परिवार  ओढ़  लिया  !

हवा  के  चप्पे- चप्पे  पर  फैली  गंध  ने ,
कभी  नहीं  बख्शा  उसे ,
हवा  की  शिकायत  जायज़  थी ,
खुद  को  मैला  किया  फिर  गंध  हवा  में क्यूँ  मिलायी ?
पायल  तो  आवाज़  कर  देती  है  सो  फेंक  दिया ,
पैरों  से  चाल  जानी  जाती  है , चलन  नहीं ,
फिर  पैरों  को क्यूँ  सिकोड़ा  मोड़  लिया  ??

आप  जब  खुद  को  देते  हैं  धोखा ,
तब  आप  खुद  ही  से  खुद  को छिपाते  हैं !
उसकी  तो  कोई  मज़बूरी  ही  रही  होगी ,
जो  सब  जानता  है  फिर  भी  साथ  है  रहता ,
परिवार  रहे  जुड़ा  सो  उसने  देर  ना  लगायी ,
उस  शख्स  ने  चुपचाप  अपना  दिल  ही तोड़  लिया !!