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Friday, October 17, 2025

ये मैं नहीं लिख रहा कविता


मेरे आंसुओं का खुशबू से तर हो जाना ;
नि:शब्दता को भींचना गले लगाना ;
जाहिर है तुमने कुंडी खटखटाई है ;
तुम्हारे साथ मेरी मुस्कान वापस आयी है !


नाहक पढ़ीं किताबें, 
कर डाले कागज़ काले ;
सीख न पाये दिल की भाषा पढ़ पाना  !
बहुत खोजा तेरे होने का मतलब ,
बीते कल को ढ़ोने का मतलब ;
मतलब का एक शहर समूचा ,
हाथ पकड़ना ; गुम हो जाना ;
फिर से तेरा लौट के आना ;
चुपचाप पड़े बिस्तर का गाना ;
जाहिर है हर सिलवट मुस्कायी है ;
सचमुच मेरी मुस्कान वापस आयी है !


देखो सागर का उछलना - मचलना ;
समझो उसका आनंदित हो जाना ;
जाहिर है उसमें नदी समायी है ;
ये मैं नहीं लिख रहा कविता, 
ये तो मेरी मुस्कान वापस आयी है !!
------------------- तनु थदानी