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Thursday, December 25, 2025

मैं जब भी दर्द लिखुंगा


मैं  जब  भी  दर्द  लिखुंगा, 
नम  दीवार  लिखुंगा !

एक  झुलसी  वफा की शक्ल,
एक  सन्नाटा,
एक  तन्हाई,
फिर  तेरा  प्यार  लिखुंगा !

मैं  जब  भी  दर्द  लिखता  हूँ ,
मुझमें  मैं  खोता  है !
मैं  कतई  मैं  नहीं  होता ,
कईयों  के  आंसू  बटोर  कर,
मेरे  दिल  के  खुले  बरामदे  में ,
मेरा  सुकून  रोता  है !

मैंने  जब  भी  दर्द  लिखा है ,
एक  बिस्तर  लिखा  है !
नागफनियों  से  लथपथ  बिस्तर  पे ,
मैंने  इक इक  सांसे  खोई  हैं !
क्या  लिखा  देख  लिया  ,
क्यूँ  लिखा  , ये  न समझा  कोई  है !
कहीं  परोसा  गया  ,
कहीं  बजी  तालियाँ ,
कोई  शब्दों  पे फिदा  हुआ  ,
कोई  मेरी  शैली  पे !
हर  इक  ने  लिया  आनंद  ,
केवल  मेरी  माँ  रोई  है !!
--------------  तनु थदानी