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Wednesday, May 1, 2013

बेशक हम समझदार हैं

नहीं  था  कोई  विकल्प ,
सिवाय  चुप  रहने  के !

केवल  देखो  मेरे  जख्मों   को ,
ना  छूना - ना   बाँधना ,
सूखने   तक   खुला  रखुंगा  इसे ,  वरना  दर्द  बिखर  जायेगें  !

इतने  सारे  जख्म मेरे  वज़ूद  पर  आये  कैसे , मत  पूछना ,
ना  जाना  गहराइयों  में ,
मेरे  कुछ  अपनों  के  चेहरे  उतर  जायेंगे !

प्रेम  के  नाटक  में  मर गया  कलाकार ,
मगर  किरदार  ज़िंदा रहा !
वो  तो बहाना  था , कि  आँखों  में  कुछ गिर  गया ,
कारण  अनेक  थें  आंसुओं  के  बहने के ,
जो  हम  कभी  नहीं  बतायेंगे  !

दुनियादारी  की  आड़  में  छिपते  लोग ,
नहीं   बन  पाते  मित्र ,
मेरी  मानो ,  दुनियाँ  में  अपने  क़दमों  से  चलना ,
नहीं  तो ,
कंधों  पे  उठा  के  घुमाने  वाले ,
कहीं  भी  पटक  आयेंगे ,
दुनियाँ  ऐसे  ही चलती  है , पूरी  बेशर्मी   से  समझायेंगे !

बेशक  हम समझदार  हैं ,
पूरी  समझदारी  दूसरों  को  खुश  रखने  में  लगाते  हैं ,
कार्य  सिद्ध  नहीं  होने  पर नाराज हैं  होते ,
ऐसी  समझदारी के  साथ ,  हम  खुश  कैसे  रह  पायेंगे ?

चलो  !  खुश  रहने  के  लिये  कुछ  ऐसा  करते  हैं ,
दिल  पे  जख्म  देने  वालों  के नाम ,
दिल  में  दफ्न  करते  हैं !

कोई  लिखेगा  - कोई  बजायेगा - कोई  सुनेगा ,
तभी  तो  हम  गायेंगे ....
क्यूँ  न  यूँ  मिलें  सबों  से ,
ज्यों  कल  हम लौट  के  ना  आयेंगे  !!
----------------- तनु थदानी