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Sunday, April 30, 2017

तू मेरा हाथ मत छोड़ना माँ

जब भी घर को बचाने के लिये, 
उसे बाहों में भर लेता हूँ ,
मेरी ही छाया मेरे धैर्य को निगल, 
ध्वस्त्  कर देती है मुझे !

माँ , जब तू काँपती है अपने ही घर की कंपन में ,
तब शर्म  से मेरी आंखे झुकती हैं ,
असमर्थ हो जाता हूँ , सो मेरे कंधे भी झुकते हैं !

माँ , सच कहता हूँ ,
हार गया मैं अपनी छाया से !
न बैठा हूँ अब तलक , न ही सोया हूँ ,
मेरी पीठ दुखती है , मेरे पैर दुखते हैं !!

मेरे कमरे के कोने में दुबकी हँसी की गवाही ले लो ,
मैं सचमुच नहीं मिला वर्षों से उससे !

बचपन में तेरे लिये पूरा शहर खरीदने वाला मैं ,
एक कतरा मुस्कान न ला सका तेरे लिये ,
बड़े होने का दंश झेलता हूँ ,
तू मेरा हाथ मत छोड़ना माँ !
बह न जाऊं मैं ,
मेरे आंसू तो तेरे आंचल में ही रुकते हैं !!😢😢