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Thursday, December 25, 2025

चहकेंगी मेरे घोंसले में भी चिड़िया




मेरी  हँसी में, 
ढ़ेर सारी हँसी है ,
फिर भी खुशी की एक घड़ी बाकी है !

मेरी खुशियों में, 
मैं हूँ , तुम हो , परिवार है पूरा ,
मगर हम में एक कड़ी बाकी है !

मैं हूँ पुरुष,
बेटा हूँ , पति हूँ , बहुत  कुछ हूँ ,
मगर पूरा नहीं मैं पुरुष ,
मेरे ख्वाबों  में नन्ही एक परी बाकी है !

एक स्वेटर सा बुना जाना तो जीवन नहीं ,
महज सांसो का आना जाना भी जीवन नहीं !
मेरे ख्वाबों से रिसता है एक जंगल,
जहाँ मचान हैं , झाड़ हैं , पूरी नोक वाले तिनके हैं ,
चुभते हैं ,
मगर अम्मा ने बताया था - घबराना भी जीवन नहीं !

मिला है जंगल तो घोंसला बनाऊंगा ,
चहकेंगी मेरे घोंसले में भी चिड़िया ,
अभी मेरे ख्वाबों की एक लड़ी बाकी है !!