लड़ाई मेरी मेरे धैर्य से थी, तुमसे नहीं,
मगर हार गया मैं ,
तुम्हें लग रहा है तुमसे हार गया मैं,
सच तो ये है ,
तुमको हार गया मैं !
तुम्हारा इश्क अधीन है तुम्हारी काया के ,
सो बूढ़ा हो रहा साथ तुम्हारे !
मेरा इश्क अधीन है मेरी छाया के ,
उम्र दिखेगी ही नहीं किसी किनारे !
किसी दिन सो के उठोगी तुम,
मगर मैं नहीं उठूंगा,
अपनी जीत का जश्न तब मनाना ही पड़ेगा तुम्हें !
रोना चाहो या न चाहो,
रो के दिखाना ही पड़ेगा तुम्हें !
तब मुकाबला तुम्हारा ,
सुख से होगा तुम्हारे ,
हार गयी तो सब पूछेंगे अब क्या करोगी,
खुश मत होना,
जीत के गड्ढे में तो अकेली ही गिरोगी !
सुख हो या खुशी या जीत ही क्यों न हो
सब नज़र आयेंगे
पकड़ने जाओगी,हाथ नहीं आयेंगे !
हमारा प्रेम नहीं मरेगा,
वो चला जायेगा साथ मेरे ही,
देखना जब भी उस पार गया मैं !