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Friday, October 17, 2025

अच्छा हुआ

मैंने   तो  जीना  शुरू   ही   नहीं  किया  अब तक ,
क्यों  कि ,
जीने   के  लिये  तो   चाहिये   एक  अदद  जीवन  !

चरित्र   से  कुपोषित  चेहरों  पे ,
जीवन   की  नकाब  ओढ़े  जिंदगियों  ने , 
सहमा  दिया  है !

नहीं  चाहिये  जीवन   ऐसे  माहौल  में ,
पूरा   का पूरा  खिलवाड़   है  ये जीवन  ,
बिलकुल  सही   बता रहा  हूँ  मैं !

साँसों   को   आपत्ति  नहीं    होती ,  तो,
मैं   हरगिज  जान  नहीं    पाता ,
कि  ये  जीवन  सारा  का  सारा ,
खिलवाड़  है    साँसों   के  साथ !

अच्छा   हुआ ,
मैंने   जीना   शुरू   ही   नहीं  किया  अब तक !!