मेरी शब्दों की यात्रा में,
इन्हें पढ़ना नहीं महसूस करना,
जिंदगी में अपने प्रिय के चेहरे की मुस्कान की तरह!
नहीं मिलेगा फिर कोई जन्म,
ना ही कोई दुनियाँ,
अगर खो गया तुम्हारे प्रिय का चेहरा ,
तो मानों अनंत काल के लिये खो गया ,
यादों की भठ्ठी में जा सो गया एक ध्यान की तरह!
हमारा रूप, हमारा नाम सब ही वजनहीन हैं,
वजन केवल आज में है,
कल तो निश्चित है ही नहीं,
सो जितना आनंद समेट सको समेट लो,
आज की खुशी को आज ही महसूस करो,
अपने सभी प्रिय के दायरे को अपना लो पूरे जहान की तरह !
किसी के झांसे में न आना,
कोई ज्ञान न अपनाना,
सब छूटेगें धीरे धीरे,
कोई शिकन माथे मत लाना,
तुम तो खुद से भी छूटोगे धीरे धीरे,
धीरे धीरे समझ ही लोगे ,
किसी का आना किसी का जाना,
बस खुद से बिछड़ने से पूर्व,
प्रियजनों की आंखों में घुल जाना,
फिर नजर आओगे सदा चांद के निशान की तरह !!
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