Wednesday, August 31, 2016

देखो ना

अब मनाऊँ कैसे ?
रूठा भी, 
चला गया दूसरी दुनिया में !
बदल गया मैं, 
पर बदल नहीं पाया अपनी दुनियां  !
रहना है इसी दुनिया में सूखी घास सा !!

रात को अंधेरों से रूठने मत देना ,
दिन में उजाले टूटने मत देना ,
बारिश हो तो भींगना ,
दौडना भागना ; मगर हाथ छूटने मत देना  !
बहुत कुछ छूट गया, 
जो छूट गया उसे बताऊँ कैसे ?
वो तो रच गया गले में इक प्यास सा !!


कल रात तूफान में उड़ गयी छत ,
घर नंगा हो गया ,
मैं कविताएँ लिखता रह गया जमीन पर ,
मेरे साथ हंसता - खेलता - लड़ता चेहरा, 
अचानक आसमान का हो गया !
मैं उस तक जाऊँ कैसे ?
देखो ना , मैं ही टूट गया एक विश्वास सा !!
------------------------तनु थदानी

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