Sunday, December 27, 2015

मेरी माँ को मत बताना



बहुत सारा सूनापन है मेरे पास, 
ढ़ेर सारे सौतेले सपने भी हैं ;
कोई खुशबू थी मेरी आँखों में लबालब, 
बह गयी डबडबा कर अभी अभी !
मेरी कवितायी भी ;
मेरे रोने का इंतजार करती है !
अगर ये ही जीवन है, 
तो ; मैं जिन्दा क्यूं हूँ ??


वही प्रेम को जीता है, 
जो प्रेम को पीता है !
हौले हौले आत्मा मरती है उसके जिस्म में ;
जान गया हूँ मगर आँखें बंद कर ली हैं !
गर कोई बेशर्म है, 
तो ; मैं शर्मिंदा क्यूं हूँ ??

एक छत चार दीवारों के भीतर, 
बेहद आहिस्ते से, 
एक घर था बनाया ;
माँ साफ़ साफ़ देख सके, 
सो एक ऐनक था लाया !
अब माँ से अपनी आँखें छिपाता हूँ ;
रोक नहीं पाता तो काला चश्मा लगाता हूँ!
मेरे पिंजरे ; तू तो सारी कहानी जानता है ना ;
मेरी माँ को मत बताना
कि मैं ; असहाय सा परिंदा क्यूं हूँ !!
------------------- तनु थदानी

Wednesday, December 23, 2015

अफसोस ; हम इंसान हैं

तुमसे पहले मरा तुम्हारा नाम ,
तुम शांत बिलकुल शांत चिता पर लेटे हो !
यहाँ कोई तुम्हें तुम्हारे नाम से नहीं पुकार रहा !


वो चिड़ियाँ बदहवास सी क्यूं है ?
नहीं बता पा रही, 
कि तुम्हारी चिता की लकड़ियों पर, 
घोंसला था उसका ,
बच्चे थें उसके !
मर गया घोंसला तुम्हारे मरने से पहले ,
सब गुम हो गये उसके बच्चे यकायक ,
पेड़ तो लकड़ियाँ बन चुका
जिस पर तुम शांत बिलकुल शांत लेटे हो !

तुमसे पहले मरी वो पेड़ की छांव ,
जो सांस ले रही थी ,
तुम्हें सांस दे रही थी !
पेड़ की छांव का मरना, 
नहीं थी नियति उसकी ,
तुम तो छांव की लाश पर ही, 
शांत बिलकुल शांत लेटे हो !


तुम्हारा नाम, 
वो चिड़ियाँ का घोंसला, 
वो पेड़, 
वो पेड़ की छांव, 
सब जीवित रहते, 
अगर तुम आदतन न मरते !


काश ! हम पेड़ बन पाते ,
मरते मरते फल फूल लकड़ियाँ तो दे जाते !
अफसोस ; हम इंसान हैं ;
मरते मरते कईयों को मार जाते हैं !
आंखें किडनी लीवर बहुत कुछ होता है देने को ;
नहीं दे पाते ;
चुपचाप चिता पर लेट जाते हैं ,
जैसे कि तुम शांत बिलकुल शांत चिता पर लेटे हो !!
---------------------- तनु थदानी