फिर मिलेंगे,
कहते हैं विदा होने से पहले,
कितने आशावान हैं हम और तुम !
बेवकूफियों के अस्तर लगी जिंदगी जीते हैं ;
कल का नहीं पता,
मगर अगले कई सालों की रूपरेखा में हैं उलझे ;
हरे से लाल हैं होते,
कि जैसे पान हैं हम और तुम !
हमारे जिस्म के भूगोल का,
इतिहास बनने का गणित ,
पूरा दर्शन शास्त्र है !
घड़ियां तो आईना होती हैं,
टिक टिक कह कह,
नहीं टिकती हैं खुद,
न देती हैं टिकने ;
बताती हैं -
इसी परिपथ में घूमना ही जीवन मात्र है !
तुम मुझमें,
मैं उतरता हूँ तुझमें,
खोजते हैं जीने को प्यार के पल ;
कैसे मान लू्ं कि मात्र सांसों की खान हैं हम और तुम !!
कहते हैं विदा होने से पहले,
कितने आशावान हैं हम और तुम !
बेवकूफियों के अस्तर लगी जिंदगी जीते हैं ;
कल का नहीं पता,
मगर अगले कई सालों की रूपरेखा में हैं उलझे ;
हरे से लाल हैं होते,
कि जैसे पान हैं हम और तुम !
हमारे जिस्म के भूगोल का,
इतिहास बनने का गणित ,
पूरा दर्शन शास्त्र है !
घड़ियां तो आईना होती हैं,
टिक टिक कह कह,
नहीं टिकती हैं खुद,
न देती हैं टिकने ;
बताती हैं -
इसी परिपथ में घूमना ही जीवन मात्र है !
तुम मुझमें,
मैं उतरता हूँ तुझमें,
खोजते हैं जीने को प्यार के पल ;
कैसे मान लू्ं कि मात्र सांसों की खान हैं हम और तुम !!
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