Tuesday, December 17, 2013

तनु थदानी की कविताएँ आ जाओ फिर से tanu thadani ki kavitayen aa jaao fir se

रोया मैं बिछड़ कर तुमसे ,
लगा धुल कर मेरी आंखों से,
जिंदगी फिसल गयी !
कुछ तो था मेरे भीतर सुलगता सा,
अरे ! क्या तुम थी ??
तभी तो मेरी मौत जल गयी !

प्रेम का अपना ही व्याकरण है होता ,
प्रेम का अपना ही शब्दकोष होता है ,
जब हम नहीं मानते उस शब्दकोष को ,
सरल सा प्रेम एक पेचीदेपन में खोता है !

जब मैं तुम्हारे भीतर चल रहा था ,
तुम चल  रही थी मेरे भीतर ,
पता  नहीं चलने दिया कमबख्त उम्र ने ,
कि कब कैसे तुम मेरी आदतों में ढल गयी !

जीवन की महफिलों में ,
हंसी में , मुस्कुराहट में ,
आलिंगन से ले कर नशीली चाहत में ,
वादों का खजाना मिला हर दामन में !
गठबंधनों के सैलाब में ,
घुल गयीं जिंदगीयां ,
सब मिला , बस प्रेम की कमी खल गयी !

क्या आज भी प्रेम होता है ?
आ जाओ फिर से ,
तुम आखरी साक्ष्य बनोगी प्रेम का ,
मेरे पास बची हैं कुछ सांसे , संभालो उसको ,
अनगिनत सांसे तो तुम्हें याद करते - करते ही निकल गयीं !


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